खाना सेहो नाना प्रकारक होइत अछि। भ्रम मे नहि पडी हम कोनो खायवला चीजक विषय मे नहि कहि रहल छी। आब तऽ बुझिये गेल होयबैक जे हम केहन खानाक विषय मे कहि रहल छी। नइँ बुझलियइ...ओह, अहाँ केँ कतबो हम अपन संगे रखलहुँ तइयो बुधिक ताला नहि खुजल लगयए। कतबो बुद्धिवर्धक चूर्ण (खैनी) खुअओलहुँ तइयो अहाँक बुधि तेज नहि भेल अछि। ओना एकटा फकरा कऽ अवश्ये मोन अछि जे अहाँ बेसी काल पढैत छी-चालि प्रकृति बेमाय, तीनू संगे जाय। से तऽ जहिना हमरा पर लागू होइत अछि तहिना अहूँ पर लागू होइत होयत। से अहूँक चालि नहि बदलत शाइत।
खुरचन भाइ ओहि दिन बेस हल्लुक सन छलाह। पहिल बेर एहन लगैत छल जे ओ चिंता फिकिर ताक पर राखि अयलाह अछि हमरा दलान पर। नहि तऽ हुनक कपार पर कम सँ कम तीनटा रेघा अबस्से पारल रहैत अछि आ से स्थायी रूप सँ। सांझक पांच बाजि रहल छल से चाहक बेर ओहिना भऽ गेल छल। मोन मे विचार अबैत छल जे अंगनाक मुँह पर जा कहैत छियैक मुदा तखनहि गुलटन चाह लऽ हाजिर भऽ गेल। आ खुरचन भाइक ठोर पर एक बेर फेर मुस्की पसरि गेल छलनि। ओ अविलंब ट्रे मे राखल दूटा कप मे सँ एकटा हथिया लेलनि। आ कहलनि-खानाक बात शुरू कयलहुँ तऽ पीना आयल। चाह पीबि बुद्धिवर्द्धक चूर्ण खुआयब अहाँ केँ। मुदा पहिने हमर बात आधे रहि गेल अछि। तऽ अहाँ केँ कहैत छलहुँ खानाक विषय मे। ओह..छोडू पहिने एक विशेष
प्रकारक खानाक विषय मे कहैत छी। विस्तार सँ बाद मे कहब। खाना मे मिथिलाक खानाक तऽ कोनो तुलने नहि अछि मुदा एहि ठाम कारखानाक अति अभाव अछि। हम कहलियनि-कोन चीजक यौ। जाहि ठामक लोक एतेक बुधियार, चलाक, विद्वान, गुणी ताहि ठाम कारखानाक अभाव...बात किछु हजम नहि भेल। ओ कहलनि-कारखाना दू शब्द कार आ खानाक मेल सँ बनल अछि। एम्हरका रोड तेहन ने छैक जे कार चलब मोश्किल...सुखलो मे फँसि जाइत छैक। आ खाना खा कऽ बैसय लोक तऽ बुधू जे पेट फुलि जाय। से कारखाना ताही लेल एम्हरका लोक केँ सूट नहि करैत छैक। हम कहलियनि- भगवाने जखन वाम भेल छथिन तऽ......। सरकारक उदासीनता एहि क्षेत्र मे कारखानाक दुर्दशा लेल दायी अछि। ओह...के कहैत अछि जे एहि क्षेत्र मे कारखाना नहि अछि। हम ताहि पर कहलियनि-माथा तऽ अहाँक ठीक अछि ने आ कि फ्यूज उडि गेल अछि आइ-काल्हि। एखनहि तऽ कहलहुँ अछि जे एहि क्षेत्र मे कारखानाक अभाव अछि आ एखनहि बात पलटि गेलहुँ। ओ हमर बात पर जोर सँ हँसैत कहलनि-ओह..बात बाजि फेर पलटि जायब, सीख रहल छी हम। कारण राजनीति मे जँ कनियो पैठ रखबाक अछि तऽ ई गुण पहिने आवश्यक अछि। मुदा हम थोडहि पलटलहुँ अछि अपन बात सँ..कने नजरिक फेरा अछि। हमर कहबाक मतलब छल जे मिथिला मे गप्पक कारखाना सगरो व्याप्त अछि। गप्प पर जँ अमल हो तऽ ई क्षेत्र देशक सभ सँ विकसित क्षेत्र बनि जायत। मुदा एहि ठामक कारखाना मे मात्र गप्पेटाक उत्पादन होइत अछि। हम कहलियनि-पहिने चाह पीबि लिअय नहि तऽ गप्पक फेरा मे ओहो ठंढा जायत। भाइ तखनहि चाह सुरकय लगलाह। – नवकृष्ण ऐहिक
Note: मैथिली दैनिक 'मिथिला समाद' मे अगस्त २००८ सं दिसम्बर २००९ धरि दैनिक रूपें प्रकाशित धारावाहिक व्यंग्य 'खुरचन भाइक कछ्मच्छी' केर एक अंश. For Details Visit - www.rkjteoth.blogspot.com